Subhas chandra bose biography in hindi. Life History of Subhash Chandra Bose : Father of the Indian Freedom 2019-02-22

Subhas chandra bose biography in hindi Rating: 9,3/10 1896 reviews

Biography of Subhas Chandra Bose

subhas chandra bose biography in hindi

आज उनके जन्मदिन पर रंगून में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण का स्मरण आवश्यक है. Congress In freedom struggle congress was large organisation. He succumbed to his injuries on Aug 18, 1945. Cole, and Sir Stafford Cripps. Life history of Subhash Chandra Bose Subhash Chandra Bose was born on 23 January, 1897 in Cuttack Orissa to Janakinath Bose and Prabhavati Devi. Rash Behari handed over them to Netaji Subhash Chandra Bose. He attempted to get rid of in during with the help of and.

Next

Netaji Subhash Chandra Bose Biography

subhas chandra bose biography in hindi

Additionally, he even took charge of publicity for the Bengal Provincial Congress Committee. One of its first actions as such was the organization of a national planning committee in charge of designing an economic program of modernization and industrialization for India. First the Figgess Report in 1946 and then the Shah Nawaz Committee in 1956, concluded that Bose had indeed died in the crash in Taiwan. In 1939 managed to defeat in the elections to the presidency of the National Congress the candidate of Gandhi. सुभाषचन्द्र बोस भारतीय इतिहास के ऐसे युग पुरुष हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई को एक नया मोड़ दिया था. During the time he traveled the continent he sought to reclaim the support of Western governments for Indian independence and wrote his book The Struggle of India, 1920-1934.

Next

सुभाष चंद्र बोस की जीवनी

subhas chandra bose biography in hindi

On 21 October, he established an independent provisional government in Rangoon Burma , from which he assumed the presidency, and gave orders to advance the Indian National Army Azad Hind Fauj , supported by Japanese troops. In a stubborn battle, the mixed Indian and Japanese forces, lacking Japanese air support, were defeated and forced to retreat; the Indian National Army nevertheless for some time succeeded in maintaining its identity as a liberation army, based in Burma and then. Dispute with the Congress In 1928, during the Guwahati Session of the Congress, a difference of opinion surfaced between the old and new members of the Congress. He was a contemporary of , at times an ally and at other times an adversary. Also many Indians believed that he didn't die that time. के सफल उम्मीदवारों में अपना नाम देखा। इन्होंने योग्यता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया था। आई.

Next

Biography of Subhas Chandra Bose

subhas chandra bose biography in hindi

पिता शहर के मशहूर वकील थे. Congress party had undertaken a mission of opposing his every thought, insulting him and to stifle his highflying ambitions. Although initially aligned with the Indian National Congress, he was ousted from the party due to his difference in ideology. Together they represented the more militant, left-wing faction of the party against the more compromising, right-wing Gandhian faction. Subhash Chandra Bose became a strong leader in Congress and he made brave attempt to mould the entire party differently. The government of India set up a number of committees to investigate the case and come out with truth.


Next

Subhas Chandra Bose

subhas chandra bose biography in hindi

Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. आनर्स दर्शनशास्त्र के प्रथम वर्ष के छात्र थे। लाइब्रेरी के स्व-अध्ययन कक्ष में पढ़ते हुये इन्हें बाहर से झगड़े की कुछ अस्पष्ट आवाजें सुनायी दे रही थी। बाहर जाकर देखने पर ज्ञात हुआ कि अंग्रेज प्रोफेसर ई. Bose was soon after deported to Burma because he was suspected of connections with secret revolutionary movements. There the army raised by Bose survived some time like force of liberation of India, happening later to Indochina. He also adored Vivekananda as his spiritual Guru.

Next

Life History of Subhash Chandra Bose : Father of the Indian Freedom

subhas chandra bose biography in hindi

The Nazi regime welcomed him as an enemy of Britain and made available to him the means of the recently created Special Office for India, led by Adam von Trott. He was admired within the congress for his great ability in organization development. He went on to form the Forward Bloc the same year. Subhash Chandra Bose History In Hindi परन्तु फिर भी नेताजी ने हौंसला और उनका जुनून के चलते वे सिविल सर्विस की परीक्षा के लिए आवेदन किया और परिणाम में उनका पूरे अभियर्थियों में चौथा स्थान प्राप्त किया जो अपने आप में एक बहुल बड़ी कामयाबी थी। पिता की इच्छा भी की सुभाष चन्द्र आईसीएस बनें पर उनकी उर्म उस समय इतनी हो गई थी कि उनको वो परीक्षा एक बार में ही पास करनी थी। Netaji Subhash Chandra Bose ने पिताजी से एक दिन का समय यह सोचन के लिए मॉगा ताकि वे परीक्षा देने या ना देने के लिए एक निर्णय ले सके। सारी राम नेताजी को इस असमंजस के कारण इनका क्या किया जाए ये सोचते रहे। फिर उन्होंने परीक्षा देने का निश्चय किया और 15 सितम्बर 1919 को इंग्लैण्ड गए वहॉ परीक्षा की तैयारी के लिए किसी भी स्कूल में दाखिला न मिलने पर सुभाष चन्द्र बोस ने किसी तरह किटट्स विलियम हाल में मानसिम एवं नैतिक विज्ञान की आँनर्स परीक्षा का अध्ययन किया उस समय आँनर्स परीक्षा का नाम ट्राइपास था। प्रवेश लेना तो एक छोटा सा कदम था किन्तु लक्ष्य तो आईसीएम में पास होना था वो भी प्रथम प्रयास में । दिन-रात सुभाष ने अपना लक्ष्य भेदने के लिए एक कर दिया और जो परिणाम निकला वो था उनका चौथा स्थान जो कि एक मिशान कायम करता है उनके लगन की। 1920 में पिता ने जो कहा वो पूर्ण रूप से करके दिखाया और अच्छी स्थान के साथ आईसीएस पास किया। सुभाष चंद्र बोस इतिहास नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित होने के बाद उन्होंने भारत में राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। उनकी यह नीति गॉधी के विचारों के अनुकूल नहीं थी। तथा सुभाष चन्द्र बोस जी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे। सुभाष चन्द्र बोस युवा, जोशीने एवं क्रांतिकारी दल के प्रति उत्सुक थे। महात्मा गॉधी और बोस के विचार धाराए अलग-अलग थी पर दोनों का लक्ष्य एक ही था। वो था देश की आज़दाी। साथ ही गॉंधीजी को सर्वप्रथम राष्ट्र-पिता की उपाधी से नेताजी ने संबोधित किया था। Subhash Chandra Bose Speech In Hindi राजनीति में कदम रखने के पहले सुभाष चन्द्र बोस ने दुनिया के कई हिस्सों का भ्रमण किया। तीन वर्ष तक वे यूरोप में रहे। यूरोप में उस समय हिटलर के नाजीवाद और एक तरफ मुसोलिनी के फासीवाद का दौर था। तथा इन दोनों का निशाना इंग्लैंड था, क्योंकि विश्व युद्ध के बाद जर्मनी पर बिना स्वीकृति समझौते किए गए थे। उनका बदला हिटलर और मुसालिनी लेने के लिए इंग्लैंड का निशाना बनाया। भारत पर उस समय अॅग्रेजों का कब्जा था उस समय नेताजी मुसालिनी और हिटलर के भविष्य के दोस्त के रूप में दिखाई पड़ रहे थे। क्योंकि सुभाष चन्द्र बोस की विचार धारा यह थी कि आजादी के लिए राजनीति और कूटनीति तथा सैन्य सहयोग, बल की आवश्यकता होती है। Subhash Chandra Bose Photos सुभाष चन्द्र बोस के जीवनी का अध्ययन करने पर 99 हिन्दी के लेखक को यह पता चला जो काफी अहम तथ्य है हमनें पाया की बाकी लेखक जो सुभाष चन्द्र बोस के सम्बन्ध में लेख या उनकी जीवनी के बारे में कुछ भी लिखते है तो वे उनके विवाह जो कि उन्होंने प्रेम विवाह के रूप में किया था! इस सफर के दौरान वे लापता हो गए. In 1936 he was able to return to his country, but remained for a year in police custody. Subhash Chandra Bose now started a mass movement against utilizing Indian resources and men for the great war.

Next

Netaji subhas chandra bose biography Latest News in Hindi, Photos, Videos on Netaji subhas chandra bose biography InextLive Jagran

subhas chandra bose biography in hindi

This insulted Gandhi group, which lead to their less interest of thinking towards parties campaign for independence. Subhash Chaandra Bose with Congress Subhash Chandra Bose worked under the leadership of Chittaranjan Das, an active member of Congress in Calcutta. Subhash Chandra Bose wanted to free India from the Eastern front. इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए. की परीक्षा के लिये केवल 8 महीने थे और उम्र के अनुसार ये इनका पहला और आखिरी मौका भी था। इनका जहाज निर्धारित समय से एक हफ्ते बाद इंग्लैण्ड पहुँचा। ये 25 अक्टूबर को इंग्लैण्ड पहुँचे थे। इंग्लैण्ड पहुँचने से पहले ही इनका अध्ययन सत्र शुरु हो गया जिससे किसी अच्छे कॉलेज में प्रवेश का मौका मिलना भी कठिन था। अतः अपनी इस समस्या को लेकर सुभाष चन्द्र बोस इंडिया हाऊस के भारतीय विद्यार्थियों के सलाहकार से मिलने गये। इस मुलाकात से इन्हें भी निराशा ही हाथ लगी। चारों ओर से किसी भी प्रकार के सहयोग की उम्मीद न होने पर ये सीधे कैंम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गये। किट्स विलियम हॉल के सेंसर परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की योग्यता का आंकलन करने वाला बोर्ड ने इनकी समस्याओं को देखते हुये प्रवेश कर लिया और 1921 जून में होने वाली परीक्षा के लिये छूट भी प्रदान कर दी। सिविल परीक्षा निकट होने के कारण इन्होंने अपना सारा समय तैयारी में लगा दिया। मानसिक और नैतिक विज्ञान आनर्स की तैयारी के लिये लेक्चर लेने के साथ ही अपने पाठ्यक्रम से संबंधित इंडियन मजालिस और यूनियन सोसायटी के कार्यक्रमों में भाग भी लेते थे। अपने लेक्चर के घंटों के अतिरिक्त भी इन्हें पढ़ाई करनी पड़ती थी, जितनी मेहनत से ये पढ़ाई कर सकते थे उतनी मेहनत से पढ़ाई की। पुरानी सिविल सर्विस के रेंग्युलेसन के अनुसार इन्हें लगभग 8-9 अलग-अलग विषयों को पढ़ना होता था। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ ही इन्होंने वहाँ के बदले हुये परिवेश को बहुत ध्यान से देखा। इंग्लैण्ड में विद्यार्थियों को प्राप्त स्वतंत्रता, सम्मान और प्रतिष्ठा ने इन्हें बहुत प्रभावित किया क्योंकि यहाँ की परिस्थिति भारत की परिस्थितियों से बहुत ज्यादा अलग थी। ये यहाँ यूनियन सोसायटी के वाद-विवाद आयोजनों में सांसदों या मंत्रियों की उपस्थिति में बिना किसी डर के अपने विचारों को रखते थे। इन्होंने देखा कि राजनीतिक दलों में लेबर पार्टी के सदस्य भारतीय समस्याओं के लिये दया भाव रखते थे। इंड़ियन सिविल सर्विस की परीक्षा जुलाई 1920 में शुरु हुई और लगभग एक महीने तक चली। सुभाष चन्द्र बोस को परीक्षा में पास होने की कोई उम्मीद नहीं थी अतः अपने घर के लिये चिट्ठी लिखी कि इन्हें अपने पास होने की कोई उम्मीद नहीं है और ये अगले साल की ट्राईपास की तैयारी में लगे हुये हैं। सितम्बर के मध्य में जब रिजल्ट आया तो इनके मित्र ने इन्हें तार द्वारा बधाई दी। अगले दिन इन्होंने अखबार में आई. Unfortunately, the tide of the World War turned and the Japanese and German forces surrendered which forced him to call off further advancement. Like many other Indian nationalist leaders, he envisioned an independent India and a complete Swaraj from British Raj.

Next

Netaji Subhash Chandra Bose Biography In Hindi सुभाष चंद्र बोस इतिहास

subhas chandra bose biography in hindi

They were now inside India and were determined to drive out the British! His sudden disappearance post 1945, led to surfacing of various theories, concerning the possibilities of his survival. The government of India set up a number of committees to investigate the case. की परीक्षा का परिणाम देखने के बाद सुभाष चन्द्र बोस को पास होने की खुशी हुई क्योंकि ये अब अपने देश भारत वापस लौट सकते थे। लेकिन इस परीक्षा के पास होते ही अब एक विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गयी। ये स्वामी विवोकानंद और रामकृष्ण के आदर्शों को मानने वाले थे ऐसी स्थिति में इस नौकरी को करना अपने आदर्शों के खिलाफ समझते थे। इस विरोधाभास की स्थिति में बोस ने अपने बड़े भाई शरत् चन्द्र को पत्र लिखकर अपने नौकरी न करने के फैसले के बारे में बताया और उन्हें खत लिखने के 3 हफ्ते के बाद 22 अप्रैल 1921 को बोस ने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फार इंडिया ई. इस फौज में न केवल अलग-अलग सम्प्रदाय के सेनानी शामिल थे, बल्कि इसमें महिलाओं का रेजिमेंट भी था. But the lack of support from the prestigious independence leader left him incapable of acting within the Party and forced his resignation. उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे. The incident brought Subhash in the list of rebel-Indians.

Next